बेटियाँ तो परायी होती है लड़कियों का घर कहाँ है उनका वजूद कहाँ है 

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बेटियाँ तो परायी होती है

बेटियाँ तो हमेसा पराया धन होती है माँ मैं तुमको कुछ कह भी नहि सकती  बस सारी बातें ख़ुद में समेट लेती हू तुमसे अब अपना दर्द भी नहि बता सकती  तुम्हारी ही बेटी हू पर तुमसे दूर हो गई   वो बेटी हू जो शादी से पहले एक छोटी चोट को भी इतना बड़ा बताती और तुम परेशान हो जाती और जल्दी से उसे ठीक करने में लग जाती पर माँ आज इतनी बड़ी बड़ी बातें किससे कहु क्यू दूर कर दिया ख़ुद से तुमसे हर दर्द अब छुपाती हू कि कहि तुम परेशान ना हो जाओ  तुमने ही मुझे जनम दिया और आज तुम इतनी दूर हो की मैं तुम्हारे गोद में सर रख कर रो भी नहि सकती इतनी आभागी हू मैं माँ

बहुत लोग है मेरे आसपास पर माँ हर दर्द और तकलीफ़ में तुम्हारे अलावा किसी कि याद नहि आती तुम सबसे पहलें याद आती हो माँ

भगवान ने  बेटियाँ बनायी ही क्यू जब हर  जगह उसे पराया ही करना था

जब मायके में रहो तो लोग कहते है कि तुम परायी धन हो तुम्हें दूसरे के घर जाना है फिर जब ससुराल में आयी तो पति ने कहा कि ये तुम्हारा घर नहीं ससुराल है 

लड़कियों का घर कहाँ है उनका वजूद कहाँ है 

लड़की से बड़ा दुर्भाग्य तो किसी का नहि हो सकता जब पेट में रहतीं है और दुनियाँ वालों को पता चलता है कि बेटी हैं तो उसे  पेंट में हीं मार देते है बाहर आने पे लोग कहते है कि बोझ आ गयीं धरती पे  पर माँ सब सुनती हैं और उसे बहुत दर्द होता है कि मेरे अंश को लोग कह रहे है और मैं कुछ नहि कर पा रही

बड़ी हो गयी तो लोग ये नहीं सोचते कि पढ़ा लिखा के नौकरी दिलाए जितना वो दहेज देते है उतना उस लड़की को पढ़ा लिखा के नौकरी दिलाए जिस चीज़ से वो अपनी पूरी ज़िन्दगी में कुछ दर्द को कम झेलेगी

दहेज का पैसा तो ख़त्म हो जाएगा फिर से उसे सब कुछ झेलना पड़ेगा वो सब करेगी पर छोटी सी बात के लिए उसे ये सुनना पड़ेगा की यें तुम्हारा घर नहि हैं

हम बेटियों को उनके बेटी होने के दर्द और परेशानियों को तो ख़त्म नहीं कर सकते लेकिन उनमें कुछ कमी तो कर सकते है उन्हें पढ़ा लिखा कर नौकरी दिला कर

एक लड़की हमेशा चुप रहती है हर बात सुनती है अगर ग़लती ना भी हो तो भी कह देती है कि ग़लती है मेरी ताकि उसका परिवार ना टूटे लोगों कि कड़वी बात भी हँस के सुन लेती है उसे बार बार ये एहसास दिलाया जाता है कि वो लड़की है उसके मर्यादा है उसकी अपनी एक संस्कृति है लेकिन लड़कों की कोई मर्यादा नहि कोई संस्कार नहि सब लड़कियों के ही होने चाहिए

जब एक लड़की इस दुनियाँ में आती है तो उसके माँ के मन में ये ज़रूर होता होगा कि फिर से मेरी बच्ची को भी सब झेलना पड़ेगा जो कुछ मैंने झेला है और उसी दिन से वो ये पूरी कोशिश करती है कि जो कुछ भी मैंने सहा है उसे ना झेलना पड़े

एक माँ  चाहती है कि उसके बेटी कि ज़िन्दगी में कोई भी दुःख ना आए

हर बेटी अपने mummy papa कि परी होती है

एक रीसर्च में ये बात सामने आयी कि एक महिला एक duty करने वाले आदमी से 1घण्टे अधिक कार्य करती है वो भी बिना किसी salary के

लेकिन फिर भी हम उन्हें सम्मान नहि देते

 

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